खाने पीने की सुविधा को लेकर बीएसफ के एक जवान का वीडियो क्या वायरल हुआ, देश में जवानों के खाने को लेकर बहस चल पड़ी है. एबीपी न्यूज की टीम छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और महाराष्ट्र पुलिस के सबसे बड़े महिला पुलिस ट्रेनिंग सेंटर जवानों को मिलने वाले खाने की पड़ताल करने पहुंची.

छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा के CRPF कैंप का हाल

दंतेवाड़ा के CRPF कैंप में एबीपी न्यूज़ ने नक्सलियों के दांत खट्टे करने वाले जवानों का हाल जानने की कोशिश की. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कोंडापारा कैंप में सीआरपीएफ 231वीं बटालियन के 300 जवान के मुस्तैद है.

खतरनाक इलाका, नक्सलवादियों का खौफ और जोखिम भरे रास्ते. कई बार तो वक्त पर राशन भी नहीं पहुंच पाता लेकिन, जवान ड्यूटी नहीं छोड़ते. कैंप तक राशन पहुंचाना भी टेढ़ी खीर होता है, क्योंकि पहले सड़क सुरक्षा देनी पड़ती है.

कैंप तक राशन पहुंचाने में मुश्किलें

अफसरों की मानें तो सुकमा और दंतेवाड़ा में कई ऐसे जिले हैं, जहां राशन हेलीकाप्टर से पहुंचता है और ऐसे में कई बार जवानों को पूरी डाइट नहीं मिल पाती. सब्जियां नहीं होतीं तो खाली आलू खाकर कई दिन काटने पड़ते हैं.

सीआरपीएफ के जो कैंप जंगल में है वहां हफ्ते-15 दिन और कई बार एक महीने में राशन पहुंचता है. सीआरपीएफ की रसोई से दूर-दराज के इलाकों में तैनात जवानों के लिए खाना जाता भी है. हालांकि खाना बरबाद ना हो इसका ख्याल भी रखा जाता है.

नियमों के मुताबिक-

आमतौर पर नाश्ते में 2 पराठा और सब्जी, कभी-कभी 2 अंडे.दोपहर खाने में दाल, चावल, रोटी -सब्जी और पापड़ या सलाद.रात के खाने में हफ्ते में 3 दिन मांसाहारी खाना.
जो मांसाहार नहीं करते उन्हें पनीर की सब्जी और खीर या सेवई दिया जाना चाहिए, लेकिन इस कैंप में ऐसा कम ही हो पाता है और कैंप का जंगल में होना एक बड़ी वजह है.

नागपुर में महिला पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की मेस का हाल

महाराष्ट्र पुलिस के सबसे बड़े महिला पुलिस ट्रेनिंग सेंटर की मेस में रोज करीब साड़े आठ सौ प्रशिक्षणार्थी महिला पुलिस सुबह का नाश्ता और दो वक्त का भोजन करती हैं. नागपुर में ये महाराष्ट्र पुलिस का सबसे बड़ा महिला पुलिस ट्रेनिंग सेंटर है.

जमीन पर सब्जी कटती दिखीं सब्जियां

इस समय यहां करीब साढे आठ सौ महिला पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग हो रही है. सुबह का नाश्ता और दोनों वक्त का भोजन यहां की मेस में तैयार किया जाता है. जहां ट्रेन्ड कुक हैं. साफ सफाई भी कम नहीं थी, लेकिन जमीन पर बिखरी सब्जियां और जमीन पर ही सब्जी काटने का काम कुछ खटकता है.

मेनू तय करने में डायटीशियन की मदद

मेनू तय करने के लिए महिला पुलिस अफसरों की एक टीम है जो कैलोरीज और मौसम का खास ख्याल रखती है. राज्य भर से आईं नई महिला पुलिसकर्मी यहां भोजन के स्तर संतुष्ठ दिखीं. खास बात ये है कि ऐसा तब है जब पहले से बताये बिना अचानक यहां पहुंचे थे.


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