यदि आप पाते हैं कि अक्सर आपका बड़ा बच्‍चा अपनी गलतियों को आसानी से मान लेता है और सजा के लिए हाजिर रहता है तो वह अकेला ही ऐसा नहीं है. शोधकर्ताओं ने पाया है कि बड़ी संतान अपनी गलतियों को अपने छोटे भाई-बहन की अपेक्षा जल्दी स्वीकार कर लेती है.

किसने करवाई रिसर्च-

मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के किए गए 4 से 9 साल के बच्चों में किए एक रिसर्च के दौरान बच्चों ने इमैजिनरी सिचुएशन में मिस्‍टेक्‍स कीं और फिर इन मिस्‍टेक्‍स को एक्‍सेप्‍ट किया या झूठ बोला.

रिसर्च के नतीजे-

शोध के परिणाम में सामने आया कि चार से पांच साल के बच्चों में पॉजिटिव भावनाओं से ज्यादा जुड़ने की बात सामने आई. उन्होंने अपनी गलतियों की वजह से झूठ बोलने या नेगेटिव होने की बजाय गलतियों को स्वीकार किया.

दूसरी तरफ, सात से नौ साल के बच्चों में गलती के बाद झूठ बोलने और सकारात्मक इरादे के साथ गलती मान लेने की बात देखी गई.

रिसर्च का मकसद-

प्रमुख शोधकर्ता क्रेग स्मिथ ने कहा कि रिसर्च का मकसद बच्चों के झूठ बोलने और स्वीकार करने की भावनाओं की पहचान करना है. शोध में यह भी टेस्‍ट किया गया कि क्या ये इमोशंस बच्चों की स्वीकार करने की प्रवृत्ति या वास्तविक दुनिया के हालात से प्रभावित होते है. शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि बच्चे अपना बचाव कैसे करते हैं.

बच्‍चे से खोले बातचीत का रास्‍ता-

पत्रिका ‘चाइल्ड साइकोलॉजी’ में स्मिथ ने कहा कि आप बच्चे को बताएं कि आप बिना नाराज हुए उनकी बात को सुनेंगे. एक माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे के किए से खुश नहीं हो सकते, लेकिन आप यदि आप अपने बच्चे से बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं तो आपको बच्चे को बताना होगा कि उसने आपको गलती बताकर अच्छा काम किया है और आप खुश हैं.


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